Rajasthan Electricity New Rules 2026: राजस्थान में अब बिजली बिल में मिलेगी भारी छूट! जानें कैसे मिलेगा फायदा।

Rajasthan Electricity New Rules 2026: राजस्थान में तेजी से बढ़ रही सौर ऊर्जा के कारण बिजली उत्पादन और खपत के संतुलन को बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। दिन में सोलर पावर की बाढ़ आती है, लेकिन शाम को मांग आसमान छू लेती है, जिससे महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। इसी समस्या से निपटने के लिए राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने ‘डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी और डिमांड साइड मैनेजमेंट नियम-2026’ का मसौदा तैयार किया है।

इसका मकसद बिजली की मांग को स्मार्ट तरीके से शिफ्ट करके खरीद लागत कम करना और उपभोक्ताओं के बिल पर बोझ घटाना है।

Rajasthan Electricity New Rules 2026

राजस्थान में तेजी से बढ़ रही सौर ऊर्जा के कारण बिजली उत्पादन और खपत के संतुलन को बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी को देखते हुए राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने ‘डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी और डिमांड साइड मैनेजमेंट नियम-2026’ का मसौदा तैयार किया है।

इसका उद्देश्य बिजली की मांग को बेहतर तरीके से प्रबंध कर बिजली खरीद लागत कम करना और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले टैरिफ बोझ को घटाना है।

जो उपभोक्ता अपनी बिजली डिमांड को डिस्कॉम की जरूरत और बिजली की उपलब्धता के अनुरूप शिफ्ट करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन के रूप में बिजली बिल में छूट दी जाएगी। इसके लिए डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी सेल बनाया जाएगा।

यह सेल ऐसे प्लान तैयार करेगा, जिनसे बिजली की खपत को पीक समय से हटाकर सस्ती बिजली वाले समय में शिफ्ट किया जा सके। राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने इस संबंध में प्रक्रिया शुरू की है। अंतिम निर्णय से पहले जनता की सुनवाई भी तय है, जहां सुझाव लिए जाएंगे।

एग्रीगेटर से बनेगा नया बिजली बाजार नियमों में एग्रीगेटर की नई व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत कोई एजेंसी कई छोटे उपभोक्ताओं (जैसे इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, स्मार्ट उपकरण या घरेलू उपयोगकर्ता) की बिजली मांग को एक साथ जोड़कर डिस्कॉम के साथ समन्वय करेगी।

इससे बिजली मांग प्रबंधन का नया बाजार विकसित होगा, जहां फ्लेक्सिबिलिटी को बेचा-खरीदा जा सकेगा। डिस्कॉम को पीक डिमांड के प्रतिशत के आधार पर फ्लेक्सिबिलिटी पोर्टफोलियो ऑब्लिगेशन (DFPO) पूरा करना होगा, जो 2026-27 में 0.25% से शुरू होकर 2029-30 तक 2% तक पहुंचेगा।

संकट से निपटने की तैयारी, इस तरह फायदा प्रस्ताव के अनुसार राजस्थान में दिन के समय सौर ऊर्जा का उत्पादन बहुत अधिक होता है, जबकि शाम के समय मांग अचानक बढ़ जाती है। इस स्थिति को ऊर्जा क्षेत्र में ‘डक कर्व’ कहा जाता है। ऐसे समय में महंगे थर्मल प्लांट चलाने या महंगी बिजली खरीदने की जरूरत पड़ती है।

बिजली की डिमांड और खपत को ऐसे समय में शिफ्ट करना है, जब सौर ऊर्जा अधिक उपलब्ध हो। इससे ग्रिड पर भी दबाव कम होगा और रिन्यूएबल एनर्जी का बेहतर उपयोग होगा। डिस्कॉम को डेडिकेटेड DF/DSM सेल बनाना होगा, जो चीफ इंजीनियर रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगा।

इस तरह समझें:

कैसे मिलेगा बिजली बिल में फायदा मान लीजिए किसी शहर में शाम 7 से रात 10 बजे के बीच बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है। इस समय डिस्कॉम को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। अब नए मॉडल में डिस्कॉम उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन देगा कि वे कुछ काम दिन में या कम मांग वाले समय में करें। उदाहरण: एक फैक्टरी संचालक प्रतिदिन शाम 7 बजे अपनी मशीनें चलाता है। डिस्कॉम उसे सलाह देगा कि वह मशीनें दोपहर 2 से 4 बजे के बीच चलाए, जब सौर ऊर्जा ज्यादा उपलब्ध होती है।

यदि फैक्टरी संचालक ऐसा करता है तो उसे बिजली दर में छूट या इंसेंटिव दिया जाएगा। इसी तरह घरेलू उपभोक्ता एसी, वॉशिंग मशीन या EV चार्जिंग को पीक आवर्स से हटाकर दिन में कर सकते हैं। कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को भी बड़े फायदे मिलेंगे।

इससे सीधे ये फायदे होंगे

  1. उपभोक्ताओं का बिजली बिल कम होगा
  2. डिस्कॉम को महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम पड़ेगी
  3. सस्ती नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग हो सकेगा
  4. ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी और कटौती की संभावना कम होगी
  5. कुल मिलाकर टैरिफ में लंबे समय में कमी आएगी

ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की संभावना है। आयोग ने जनता से सुझाव मांगे हैं और अंतिम रूप देने से पहले विचार-विमर्श करेगा। राजस्थान इस दिशा में आगे बढ़कर अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां सोलर पावर की अधिकता को मैनेज करने के लिए डिमांड साइड को एक्टिव रोल दिया जा रहा है।

उपभोक्ताओं के लिए ये एक सुनहरा मौका है कि अपनी आदतें बदलकर बिल बचाएं और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचाएं।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी समय-समय पर बदल सकती है। कृपया किसी भी योजना या नियम का लाभ लेने से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि अवश्य करें।

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